Top 10 similar words or synonyms for xylem

blended    0.855962

acetylene    0.855526

pentane    0.855468

toluene    0.855389

propane    0.854604

epithelial    0.854351

propanol    0.853776

parietal    0.852579

fiberglass    0.852171

metavanadate    0.851079

Top 30 analogous words or synonyms for xylem

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पौधों में परिसंचरण तंत्र की क्रियाविधि पौधों को, प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया के माध्यम से भोजन निर्मित करने के लिए पानी की और प्रोटीन के निर्माण के लिए खनिजों की जरूरत पड़ती है। इसलिए, पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से जल और खनिज को अवशोषित करते हैं और पौधे के तने, पत्तियों, फूलों आदि अन्य हिस्सों में इसे पहुंचाते हैं। जाइलम ऊतक के दो प्रकार के तत्वों अर्थात जाइलम वाहिकाओं (Xylem Vessels) और वाहिनिकाओं (Tracheid) से होकर ही जल एवं खनिजों को पौधों की जड़ों से उसकी पत्तियों तक पहुंचाया जाता है।
जड़ (वनस्पति) रंभ प्राथमिक दारू (xylem) दलयक तथा प्राथमिक फ्लोएम (phloem) का बना होता है। दारू वलयक त्रिज्यात: चौरस होते हैं और मूल की एक ही परिधि में ये और फ्लोएम एकांतर होते हैं जड़ में प्राय: मज्जा नहीं होती, किंतु द्वितीजपत्री पौधों की जड़ों की अपेक्षा एकबीजपत्री पौधों की जड़ों में प्राय: मिलती हैं। रंभ की सतह पर पार्श्वीय जड़े विभज्योतकी (mesistematis) कोशिकाओं से निकलकर वल्कुट से बाहर निकलने का मार्ग बलपूर्वक बनाती हैं। मोटाई में सुस्पष्ट वृद्धि करने वाली जड़े, प्राथमिक दारू के ठीक बाहर प्राणालित बेलन के रूप में तथा प्राथमिक फ्लोएम के अंदर, संवहनी (vadcular) एधा (cambioum) विकसित करती है। एधा की बाहृा सतह से द्वितीयक फ्लोएम तथा आंतरिक सतह से द्वितीयक दारू विकसित होता है। जब जड़ों की अत्यधिक मोटाई वल्कुट को विदीर्ण कर देती है, तब वल्कुट की आंतरिक सतह परिरंभ (pericycle) या द्वितीयक फ्लाएम में कार्क (cork) बनती है। जो जड़ पहले बनती है और सीधे तने से वृद्धि करती, वह प्राथमिक जड़ कहलाती है। प्राथमिक जड़ की शाखाएँ द्वितीयक तथा द्वितीयक की शाखाएँ तृतीयक जड़े कहलाती हैं।
सपुष्पक पौधा पृथ्वी के नीचे का भाग अधिकांशत: जड़ होता है। बीज के जमने के समय जो भाग मूलज या मूलांकुर (radicle) से निकलता है, उसे ही जड़ कहते हैं। पौधों में प्रथम निकली जड़ जल्दी ही मर जाती है और तने के निचले भाग से रेशेदार जड़े निकल आती हैं। द्विबीजपत्री में प्रथम जड़, या प्राथमिक जड़, सदा ही रहती है। यह बढ़ती चलती है और द्वितीय, तृतीय श्रेणी की जड़, सदा ही रहती है। यह बढ़ती चलती है और द्वितीय, तृतीय श्रेणी की जड़ की शाखाएँ इसमें से निकलती हैं। ऐसी जड़ को मूसला जड़ कहते हैं। जड़ों में मूलगोप (root cap) तथा मूल रोम (root hair) होते हैं, जिन के द्वारा पौधे मिट्टी से लवणों का अवशोषण कर बढ़ते हैं। खाद्य एवं पानी प्राप्त करने के अतिरिक्त जड़ पौधों में अपस्थानिक जड़ें (adventtious roots) भी होते हैं। कुछ पौधों में जड़े बाहर भी निकल आती हैं। जड़ के मध्य भाग में पतली कोशिका से बनी मज्जा रहती है किनारे में दारु (xylem) तथा फ्लोयम (Phloem) और बाह्यआदिदारुक (exarch) होते हैं। दारु के बाहर की ओर आदिदारु (protoxylem) और अंदर की ओर अनुदारु (metaxyeiem) होते हैं। इनकी रचना तने से प्रतिकूल होती है, संवहन ऊतक के चारों तरफ परिरंभ (perichycle) और बाहर अंत:त्वचा (endodremis) रहते हैं। वल्कुट (cortex) तथा मूलीय त्वचा (epiblema) बाहर की तरफ रहते हैं।