Top 10 similar words or synonyms for tinea

herpesviral    0.965653

stool    0.957697

mycoses    0.956671

tapeworm    0.952217

fevers    0.950694

gonococcal    0.950241

varicella    0.950001

meningitis    0.948275

pork    0.947229

intestines    0.947020

Top 30 analogous words or synonyms for tinea

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सेहुँआ सेहुँआ (Tinea versicolor) एक चर्मरोग है। इसे 'सिउली' भी कहते हैं। इसमें त्वचा पर धब्बे बन जाते हैं। आधुनिक अनुसंधान से पता चला है कि अधिकांशतः यह 'मलेसेजिया ग्लोबोसा' (Malassezia globosa) नामक कवक से होता है।
नखकवकता नाखूनों के कवक द्वारा संक्रमित होने को नखकवकता या नखदद्रु (Onychomycosis या "tinea unguium") कहते हैं। यह नाखूनों में सबसे अधिक होने वाला रोग है। यह केवल अंगूठे में या इसके अलावा अन्य अंगुलियों की नखों में भी हो सकता है। किन्तु अंगूठों का संक्रमण अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है।
पैर की दाद पैर की दाद ('ringworm of the foot' या 'tinea pedis') कवक द्वारा लगने वाला रोग है जिसमें पाँव की त्वचा शल्की (scaling) होकर छूटती है। इसमें खुजली भी होती है। इसे 'एथलीट्स फुट' (Athlete's foot) भी कहते हैं। यह 'ट्राइकोफाइटॉन' (Trichophyton) वंश के कवक के कारण होती है तथा प्रायः नम क्षेत्रों (स्थानघर आद) में नंगे पाँव चलने के कारण एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है। यद्यपि यह मुख्यतः पाँव की त्वचा को प्रभावित करती है किन्तु शरीर के दूसरे भागों (जैसे चांपातर (groin)) में भी लग सकती है।
कुष्ठरोग विशिष्ट रूप से, डर्मेटोफाइट (dermatophyte) कवक "ट्राइकोफिटॉन वायोलीसम (Trichophyton violaceum)" के कारण टीनिया कैपिटिस (tinea capitis) (सिर की त्वचा का कवकीय संक्रमण) और शरीर के अन्य भागों में होने वाले संबंधित संक्रमण वर्तमान में पूरे मध्य-पूर्व में और उत्तरी अफ्रीका में अत्यधिक हैं और शायद वे बाइबिल के समय भी बहुत आम रहे होंगे. इसी प्रकार, ऐसा प्रतीत होता है कि कुरूप बना देने वाला त्वचा-रोग फेवस (favus), "ट्राइकोफिटॉन स्कोएन्लेनी (Trichophyton schoenleinii)", आधुनिक दवाओं के आगम से पूर्व पूरे यूरेशिया और अफ्रीका में आम था। तीव्र फेवस (favus) और इसी प्रकार की अन्य कवकीय बीमारियों से ग्रस्त (और संभवतः वे भी, जो तीव्र सोरियासिस (psoriasis) और अन्य बीमारियों, जो सूक्ष्मजीवों के कारण नहीं होतीं, से ग्रस्त थे) लोगों को यूरोप में 17वीं शताब्दी तक कुष्ठरोग से ग्रस्त के रूप में ही वर्गीकृत किया जाता था। यह 1667 में जैन डी ब्रे (Jan de Bray) द्वारा हार्लेम में "द रेजेंट्स ऑफ द लेपर हॉस्पिटल (The Regents of the Leper Hospital)" में प्रदर्शित एक चित्र में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है (फ़्रांस हाल्स संग्रहालय, हार्लेम, नीदरलैंड्स) (Frans Hals Museum, Haarlem, the Netherlands), जहां एक स्पष्ट रूप से सिर की त्वचा में हुए संक्रमण, जो कि लगभग निश्चित रूप से कवक के कारण हुआ है, से ग्रस्त एक युवा डच पुरुष का उपचार भी कुष्ठरोग से ग्रस्त लोगों के लिये बने एक धर्मार्थ चिकित्सालय के तीन अधिकारियों द्वारा ही किया जा रहा है। 19वीं सदी के मध्य काल, जब चिकित्सीय निदान के लिये त्वचा के सूक्ष्मदर्शीय परीक्षण का पहली बार विकास हुआ, से पूर्व तक, “लेप्रसी (leprosy)" शब्द के प्रयोग को शायद ही हैन्सेन के रोग के साथ उतने विश्वसनीय रूप से जोड़ा जा सकता है, जैसा कि इसे हम आज समझते हैं।