Top 10 similar words or synonyms for screw

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Top 30 analogous words or synonyms for screw

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चूड़ी (पेंच की) पेंच की चूड़ी (screw thread) पेंचों के उपर बनी हुई वर्तुलाकार (हेलिकल) संरचना को कहते हैं। यह घूर्णी गति और रैखिक गति में परस्पर परिवर्तन के करने का काम करती है।
लेथ मशीन चित्र में एक सरल खराद दिखाया गया है। खराद के बाईं ओर इसका शिरोदंड (Head stock) है, जो तैयार होनेवाले अंग को पकड़ने और घुमाने का काम करता है। शिरोदंड में एक खोखला तकला (Spindle) है जो दो धारुकों (Bearings) पर घूमता है। दोनों धारुकों के बीच में तकले पर एक पद घिरनी (Steps pulley) होती है, जिसपर प्राय: तीन पद (steps) होते हैं, इन्हीं पदों से शिरोदंड की ईषा (shaft) की गति को बढ़ाया और घटाया जा सकता है। इसी प्रकार की एक घिरनी उस धुरी पर भी होती है जिससे मोटर द्वारा इस खराद को चलाया जाता है। घिरनी के ऊपर के पट्टे को घिरनी के एक पद से सरकाकर दूसरे पद पर लाने से खराद की गति बदली जाती है। तकले के बाएँ किनारे पर दाँतोंवाले चक्र होते हैं, जिनको दंतिचक्र (Gears) कहा जाता है। इनके द्वारा खराद की नेतृभ्रमि (Leading screw) चलाई जाती है। किसी अंग पर चूडियाँ काटने के लिये नेतृभ्रमि का उपयोग आवश्यक है। और इसी से उपकरण स्तंभ (Tool post) अपने आप चलता है। जिस प्रकार की चूड़ी काटनी होगी उसी प्रकार का उपकरण प्रयोग में लाया जाएगा, परंतु प्रति इंच में चूड़ियों की संख्या दंतिचक्रों द्वारा व्यवस्थित की जाएगी। तकले के दाहिने किनारे पर खराद का चक (Chuck) होता है। इससे उस चीज को पकड़ते हैं जिसपर काम करना होता है।
जहाजरानी का इतिहास अभी भी जहाज मुख्यत: पालवाले होते थे। अमरीका ने ऐसे जहाजों की निर्माणकला में बहुत उन्नति की। सन् 1843 में "रेनबो" नामक क्लिपर (Clipper) जाति का पाल से चलनेवाला विशेष तीव्रगामी जहाज अमरीका में तैयार किया गया। इस क्षेत्र में दीर्घ काल तक अमरीका सबसे आगे बना रहा। सन् 1856 तब अंग्रेज व्यापारी अपने व्यापार के लिये अमरीकी तीव्रगामी क्लिपर जहाज खरीदते रहे। किंतु पालवाले जहाजों के दिन पूरे हो चुके थे1 धीरे धीरे पाल का स्थान वाष्प इंजिनों ने ले लिया और पहले से कहीं अधिक बड़े जहाज बनने लगे। सन् 1858 में दीर्घकाय, वाष्प की सहायता से और ऐंठे हुए डैनों (screw propellers) से चलनेवाले 18,914 टन के "ग्रेट ईस्टन" नामक जहाज ने इंग्लैंड से अमरीका की यात्रा की। इस बीच इंजिनों की बनावट में सुधार हुआ, जिससे ईंधन का खर्च कम हो गया और लंबी यात्राओं में वाष्प का उपयोग व्यापारियों के लिये संभव हो गया। स्वेज नहर बन जाने पर भारत तथा अन्य दक्षिण एशियाई देशों की यात्रा के बीच के स्थानों में कोयले के संग्रहालय स्थापित किए गए और इस नहर के कारण यात्रा की दूरी भी कम हो गई। वाष्पचालित जहाज जल्दी भी पहुँचते थे। इन बातों के कारण धीरे धीरे पालवाले जहाजों का स्थान इंजिनवाले जहाजों ने ले लिया।