Top 10 similar words or synonyms for quadratus

chaturbhuj    0.773108

parallelogram    0.755257

labii    0.693155

कटमख    0.666103

canines    0.642114

tetrahedron    0.640601

quadrilateral    0.621371

nasal    0.613643

पसह    0.612750

varnas    0.611282

Top 30 analogous words or synonyms for quadratus

Article Example
मानव शरीर की पेशियों की सूची ३. उत्तर ओष्ठ चतुरस्रा (quadratus labii superioris)
पेशीतन्त्र पीछे की ओर नितंब प्रांत में महानितंबिका, मध्यनितंबिका और लघु नितंबिका पेशियाँ (gluteus maximus, medius, minimus) नितंब पर के बृहत्‌ मांसपिंड को बनाए हुए हैं। श्रोणिफलक के बहि: पृष्ठ से निकलकर, ये ऊर्वस्थि के महाशिखर (greater trochanter) पर, या उसके पास, ऊर्वस्थि तथा प्रावरणी में लगती हैं। बाह्य और अंत: गवाक्षिकाएँ (exterior and interior) तथा ऊरुचतुरस्रा (quadratus femoris) नामक पेशियाँ भी इसी प्रांत में हैं।
पेशीतन्त्र पाँव के पृष्ठ पर केवल पादांगुलि प्रसारणी ह्रस्वा (extensor digitorum brevis) पतली, चिपटी, त्रिकोणाकार पेशी स्थित है, जिसकी कंडराएँ चार भागों में विभक्त होकर अंगुष्ठ और तीन अंगुलियों की अस्थियों में लग जाती हैं। पादतल में १८ पेशियाँ तीन स्तरों में स्थित हैं और त्वचा के नीचे पादतल कलावितान (panter aponeurosis) से ढकी रहती हैं। इस वितान को काटने पर पहले स्तर में अंगुष्ठाप्रवर्तनी (abductor pollicis), पादांगुलि संकोचनी ्ह्रस्वा (flexor digitorum brevis) और कनिष्ठापवर्तनी (abductor digiti quinti) हैं। दूसरे स्तर में पादतल चतुरस्रा (quadratus plantaris) और अनुकंडरिकाएँ (lumbricales) हैं। तीसरे स्तर में लघु पादांगुष्ठ आकुंचनी (flexor hallucis brevis), अंगुष्ठाभिवतैनी (abductor hallucis) और कनिष्ठाकुंचनी ह्रस्वा (flexor digiti quinti brevis) नामे तीन पेशियाँ हैं। चौथा स्तर सात शलाकांतरीया (interossei) पेशियों का बना हुआ है, जिनमें से चार अनुगुल्फिका के बीच में हैं और तीन अस्थियों के नीचे स्थित हैं। इनकी क्रिया इनके नाम से प्रकट है।
पेशीतन्त्र अग्रबाहु में सामने की ओर ८ पेशियाँ हैं, जिनमें ५ ऊपर और ३ उनके नीचे स्थित हैं। पीछे की ओर १२ पेशियाँ हैं, जिनमें ७ ऊपर, या बाहर की ओर और ५ उनके नीचे स्थित हैं। सामने की सब पेशियाँ बर्तुल अवताननी (pronatorteris) और दीर्घ करतला (palmaris longus) के अतिरिक्त आकोचनी (flexors) हैं, जो अग्रबाहु को बाहु के समीप खींच लाती हैं। वर्तुल अवताननी हथेली को नीचे, या पीछे की ओर, घुमाती है। दीर्घ करतला हथेली के कलावितान को तानती है, जिससे मणिबंध का स्वत: आकुंचन हो जाता है। नीचे के गंभी समूह में भी करावताननी चतुरस्रा हाथ को घुमाकर हथेली नीचे, या पीछे को, कर देती है। ये सब आकोचनी पेशियाँ प्रगंडास्थि के अधोप्रांत के अंत:अस्थिकंद (internal condyle) से एक सामान्य कंडरा तथा अस्थिकंद के ऊपर से निकलती हैं और नीचे पतली कंडराओं द्वारा हथेली की तथा अंगुलियों की अस्थियों में लग जाती हैं। इनके नाम ये हैं : वर्तुल अवताननी, दीर्घकरतला, बहि: और अंत: मणिबंध आकुचनी (flexor carpi radialis and ulnaris) पेशियाँ, उत्तर अंगुलि आकुंचनी (flexor digitorum sublimis), नितल अंगुलि आकुचनी, (flexor digitorum profundus), दीर्घा अंगुष्ठ आकुंचनी (flexor pollicis longus) और चतुरस्त्र अवताननी (pronator quadratus), चतुष्कोणकार पेशी, जो मणिबंध के पास अंत: और बहि: प्रकोष्ठास्थियों पर स्थित है और करावतानन करती है।