Top 10 similar words or synonyms for protein

acetone    0.921275

vaginal    0.917228

phenylalanine    0.916696

meningitis    0.914439

dermatitis    0.913375

phenol    0.913295

peptide    0.912280

asymmetric    0.911803

soda    0.911263

baking    0.910620

Top 30 analogous words or synonyms for protein

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ट्युबरक्युलिन दूसरा उल्लेखनीय ट्युबर्क्युलिन, 'ट्युबर्क्युलिन पी. पी. डी.' (Purified Protein Derivative), है। पुराने ट्युबर्क्युलिन की अपेक्षा यह अधिक उग्र होता है। ०.००००२ मिलीग्राम की मात्रा से ही ९५ प्रतिशत क्षयपीड़ित व्यक्तियों में अभिक्रिया होती है। इस परिमाण द्वारा अभिक्रिया न होने पर ०.००५ मिलीग्राम की मात्रा दी जाती है। लेकिन चूंकि पुराना ट्युबर्क्युलिन निरापद होता है, अत: अधिकतर उसी का उपयोग किया जाता है।
मैराथन After long training runs and the marathon itself, consuming carbohydrates to replace glycogen stores and protein to aid muscle recovery is commonly recommended. In addition, soaking the lower half of the body for 20 minutes or so in cold or ice water may force blood through the leg muscles to speed recovery.
कोशिका यह जालिका कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में आशयों (vesicles) और नलिकाओं (tubules) के रूप में फैली रहती है। इसकी स्थिति सामान्यतः केंद्रकीय झिल्ली (nuclear membrane) तथा द्रव्यकला (plasma membrane) के बीच होती है, किंतु यह अक्सर संपूर्ण कोशिका में फैली रहती है। यह जालिका दो प्रकार की होती है : चिकनी सतहवाली (smooth surfaced) और खुरदुरी सतहवाली (rough surfaced)। इसकी सतह खुरदुरी इसलिए होती है कि इस पर राइबोसोम (ribosomes) के कण बिखरे रहते हैं। इसके अनके कार्य बतलाए गए हैं, जैसे यांत्रिक आधारण (mechanical support), द्रव्यों का प्रत्यावर्तन (exchange of materials), अंत: कोशिकीय अभिगमन (intracellular transport), प्रोटोन संश्लेषण (protein synthesis) इत्यादि।
मलेरिया यद्यपि संक्रमित लाल रक्त कोशिका की सतह पर प्रदर्शित प्रोटीन पीएफईएमपी1 ("Plasmodium falciparum" erythrocyte membrane protein 1, प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम इरिथ्रोसाइट मैम्ब्रेन प्रोटीन 1) शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र का शिकार बन सकता है, ऐसा होता नहीं है क्योंकि इस प्रोटीन में विविधता बहुत ज्यादा होती है। हर परजीवी के पास इसके 60 प्रकार होते है वहीं सभी के पास मिला कर असंख्य रूपों में ये इस प्रोटीन को प्रदर्शित कर सकते हैं। वे बार बार इस प्रोटीन को बदल कर शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र से एक कदम आगे रहते हैं। कुछ अंशाणु नर-मादा जननाणुओं में बदल जाते हैं और जब मच्छर काटता है तो रक्त के साथ उन्हें भी ले जाता है। यहाँ वे फिर से अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं।
जीबी वाइरस सी लगभग २ प्रतिशत स्वस्थ य अमेरिका लोगजो रक्त दान करते है वे जी बी वी -सी के सकमित है। ओर १३ प्रतिशत रक्त दानी व्यक्ति को असंक्रमित रक्त में प्रतिरक्षीE2 प्रटीन ( E2 protein)होते है। जी बी वी-सी सीधा संचरण योन सम्बन्ध ,आंत्रेतर के द्वारा होता है इस क सबुत मील है। काहा गया हे की जीसको एडस हुआ है उनमे इस तरह का भी किटाणू पाया गाया है। कुछ पढ़ाई दिखता है एच इ वी गति य बढ़ाव को (progression of [[HIV]] )सावधान करता है।कहा गाया है कि इस तरह का रोग काही समाय तक रहता है जो की पिठी -से पिठी रहत है ओर हमें इस का समय तो पत नही है ओर अभि तक पाया नही गाय है।
जन्म जीवों के शरीर बहुत छोटी-छोटी काशिकाओं से बने हैं। सरलतम एक-कोशिकाई (unicellular) जीव को लें। कोशिका की रासायनिक संरचना हम जानते हैं। कोशिकाऍं प्रोटीन (protein) से बनी हैं और उनके अंदर नाभिक में नाभिकीय अम्ल (nuclear acid) है। ये प्रोटीन केवल २० प्रकार के एमिनो अम्‍ल (amino acids) की श्रृंखला-क्रमबद्धता से बनते हैं और इस प्रकार २० एमिनो अम्ल से तरह-तरह के प्रोटीन संयोजित होते हैं। अमेरिकी और रूसी वैज्ञानिकां ने प्रयोग से सिद्ध किया कि मीथेन (methane), अमोनिया (ammonia) और ऑक्सीजन (oxygen) को काँच के खोखले लट्टू के अंदर बंद कर विद्युत चिनगारी द्वारा एमिनो अम्ल का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहना प्रारंभ किया कि अत्यंत प्राचीन काल में जीवविहीन पृथ्वी पर मीथेन, अमोनिया तथा ऑक्सीजन से भरे वातावरण में बादलों के बीच बिजली की गड़गड़ाहट से एमिनो अम्ल बने, जिनसे प्रोटीन योजित हुए।
मलेरिया की रोकथाम तथा नियंत्रण मलेरिया के विरूद्ध टीके विकसित किये जा रहे है यद्यपि अभी तक सफलता नहीं मिली है। पहली बार प्रयास 1967 में चूहे पे किया गया था जिसे जीवित किंतु विकिरण से उपचारित बीजाणुओं का टीका दिया गया। इसकी सफलता दर 60% थी। उसके बाद से ही मानवों पर ऐसे प्रयोग करने के प्रयास चल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने यह निर्धारण करने में सफलता प्राप्त की कि यदि किसी मनुष्य को 1000 विकिरण-उपचारित संक्रमित मच्छर काट लें तो वह सदैव के लिए मलेरिया के प्रति प्रतिरक्षा विकसित कर लेगा। इस धारणा पर वर्तमान में काम चल रहा है और अनेक प्रकार के टीके परीक्षण के भिन्न दौर में हैं। एक अन्य सोच इस दिशा में है कि शरीर का प्रतिरोधी तंत्र किसी प्रकार मलेरिया परजीवी के बीजाणु पर मौजूद सीएसपी ("सर्कमस्पोरोज़ॉइट प्रोटीन", "circumsporozoite protein") के विरूद्ध एंटीबॉडी बनाने लगे। इस सोच पर अब तक सबसे ज्यादा टीके बने तथा परीक्षित किये गये हैं। एसपीएफ66 (अंग्रेजी: "SPf66") पहला टीका था जिसका क्षेत्र परीक्षण हुआ, यह शुरू में सफल रहा किंतु बाद में सफलता दर 30% से नीचे जाने से असफल मान लिया गया। आज आरटीएस, एसएएस02ए (अंग्रेजी: "RTS,S/AS02A") टीका परीक्षणों में सबसे आगे के स्तर पर है। आशा की जाती है कि "पी. फैल्सीपरम" के जीनोम की पूरी कोडिंग मिल जाने से नयी दवाओं का तथा टीकों का विकास एवं परीक्षण करने में आसानी होगी।